मनमोहन जी का कहना है कि दिल्ली से ज्यादा हरा-भरा, साफ़-सुथरा और खूबसूरत शहर भारत में दूसरा नहीं है। मेरी राय इस बारे में बिल्कुल उलट है। में एक भुक्त भोगी हूँ और मनमोहन जी ने तो कभी कुछ भोगा ही नहीं। वह भारत के प्रधान मंत्री हें, इस लिए उनके बयान अखबारों में छपते हें। मैं एक आम नागरिक हूँ इस लिए मेरी कोई राय अखबार में नहीं छपती। भला हो ब्लाग्स का, कम से कम अपने ब्लाग पर तो अपनी बात कह लेता हूँ।
इस बार बात कुछ इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि अखबार वालों को दिल्ली की सड़कों के ख़िलाफ़ मुहिम चलाना पड़ा। दिल्ली की
सड़कों से ज्यादा ख़राब सड़कें शायद भारत में कहीं और नहीं होंगी। अगर यकीन न हो तो यह तस्वीर देखिये जो कुछ दिन पहले अखबार में छपी थी.