कल अखबार में पढ़ा कि सड़क पर हुए हादसों में होने वाली मौतों का अधिक प्रतिशत सड़क पर पैदल चलने वालों का होता है. पैदल चलते-चलते अचानक ही यह लोग कार (एम्बुलेंस) में बिठा दिए जाते हैं और जहाँ उन्हें जाना था, वहां न ले जा कार उन्हें अस्पताल ले जाती है. अस्पताल में, 'मृत आए' की पर्ची लगा दी जाती है, या कुछ दिन बाद यह लोग 'मृत पर्ची' के अधिकारी हो जाते हैं.
बैसे अगर आप सरकार से पूँछें तो जवाब मिलेगा कि यह लोग सड़क पर क्यों चलते हैं? हमने पैदल चलने वालों के लिए फूटपाथ बनाए हैं, यह लोग फूटपाथ पर क्यों नहीं चलते. अब सरकार को यह कौन समझाए कि उस के बनाये फुटपाथ तो चोरी हो गए. लोगों ने फुटपाथ पर दुकाने सजा ली हैं. सरकारी बाबू, नगर निगम और पुलिस ने फुटपाथ दुकानदारों को बेच दिए हैं. साथ ही फुटपाथ से लगा सड़क का कुछ हिस्सा उन्हें बोनस में दे दिया है. पैदल चलने वाले को सड़क के बीच में चलना पड़ता है, और किसी समय भी बेचारा वर्तमान से भूतकाल हो जाता है.
मेरे एक मित्र ने कहा कि सरकार को क्या समझाओगे? सरकार जहाँ रहती है वहां के फुटपाथ थोड़े ही चोरी हुए हैं. वहां के फूटपाथ तो यहाँ की सड़क से बहुत अच्छे हैं. भूल गए जब प्रधानमन्त्री ने मुख्यमंत्री की पीठ थपथपाई थी और कहा था कि दिल्ली भारत का सबसे सुंदर शहर है. पुलिस कमिश्नर के अनुसार दिल्ली बहुत सुरक्षित है. सरकार जिन लोगों के लिए है, वह सुंदर दिल्ली में रहते हैं और सुरक्षित हैं. दूसरे लोग तो साले बेबकूफ हैं कि रोज मरते हैं, पर सुबह उठ कर वोट इसी सरकार को दे आते हैं. इतनी सी बात इन बेबकूफों की समझ में नहीं आती कि सरकार उनकी नहीं होती जिनके वोटों से बनती है.