कितने वर्ष हो गए मोबाईल सेवा ग्राहक उस घंटी से परेशान हैं जो कभी भी बज उठती है, जो न रात देखती है न दिन, जिसे इस बात की कोई परवाह नहीं कि हो सकता है आप किसी जरूरी काम में व्यस्त हों. अब तो ऐसी बिना-बुलाई घंटी बजाने वाले आप से कारण भी पूछने लगे हैं कि आप उन के द्वारा बेचे जाने वाले उत्पाद या सेवा को न खरीदने का दुस्साहस कैसे कर रहे हैं.सरकार और अदालतें भारतीय ग्राहकों की इन आक्रान्ताओं से रक्षा नहीं कर पा रही हैं. आज फिर एक खबर निकली है अखवार में. साथ के चित्र पर क्लिक करें.
क्या कभी इस देश में ऐसा समय आएगा जब भारतीय ग्राहक इस अत्याचार से मुक्त हो सकेगा?