बचपन में पढ़ा था - समय बहुत बलबान है, समय किसी के लिए नहीं रुकता, जो समय के साथ नहीं चलते पिछढ़ जाते हैं. जीवन के हर पड़ाव पर यह अनुभव भी होता गया. शिक्षा पूरी होने पर मैनेजमेंट से संबंधित व्यवसाय ही चुना. टाइम मैनेजमेंट एक मुख्य विषय रहा. पर भारत सरकार के रेल मंत्रालय की नजर में समय का कोई महत्त्व नहीं है. कितने बजटों की नौटंकी देखी है मैंने. किसी बजट में किसी रेल मंत्री ने समय की पाबन्दी की कोई बात नहीं की. रेल कब छूटती है और कब पहुँचती है यह बात कभी किसी मंत्री के ध्यान में ही नहीं रही. पिछले दिनों मैंने एक ब्लाग पोस्ट लिखी थी कि रेलों के लेट पहुँचने से कितने समय की बबादी होती है? अगर आप रेलों के देर से पहुँचने के कारण बरबाद हुए समय की गणना करें तो दंग रह जायेंगें. मेरे विचार में यह एक बहुत बड़ा अपराध है और इसके लिए रेल मंत्रालय की जितनी भर्त्सना की जाए कम होगी.
आज के अखबार में एक समाचार है - लालूजी सिंगापुर जाकर वहाँ के मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को भारतीय रेल की महान सफलताओं के बारे में बतायेंगें. लेकिन रेलों के देर से चलने से देश को कितनी आर्थिक हानि हुई है इसका जिक्र वह नहीं करेंगे. जितना फायदा लालूजी दिखायेंगे वह उस नुकसान से बहुत कम होगा जो उन्होंने देश को पहुँचाया है. अगर हम उनसे इस बारे में बात करें तो मुझे विश्वास है कि उनका जवाब होगा - ""यदि आप समय पर अपने गंतव्य पर पहुँचना चाहते हैं तब भारतीय रेल से यात्रा न करें. समय की हमारे लिए कोई कीमत नहीं है".
पिछले सप्ताह मैं उड़ीसा में झरसागुडा गया था. दिल्ली से कोलकाता तक हवाई यात्रा और वहाँ से रेल. हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस का छूटने का समय है ११.५५, पर यह ट्रेन १२.३० पर पलेटफ़ामॅ पर लगाई गई. गर्मी से बुरा हाल हो गया. आधा घंटा ट्रेन लेट चली और दो घंटा देर से पहुँची. जिस कार्य के लिए मैं गया था वह देर से शुरू हो पाया. इक्कीस लोग मेरे देर से पहुँचने से परेशान हुए. और इस सबके लिए कौन जिम्मेदार था, लालूजी और उनका मंत्रालय.
वापसी में मेरा रिज़र्वेशन आज़ाद हिंद एक्सप्रेस में था. यह ट्रेन लगभग दो घंटा बिलंब से आई. रास्ते में और बिलंब हुआ और यह ट्रेन ०८.३२ पर हावड़ा पहुँची. इसका सही समय है ०३५०. कोलकाता से मुझे ०८.२० की फ्लाईट लेनी थी पर वह मिस हो गई. टिकट बेकार गया. ११.३५ की फ्लाईट से नया टिकट लेना पड़ा. लालूजी के कारण मुझे ४५०० रुपए का नुकसान हुआ. देर से दिल्ली पहुँचा. घर वाले बहुत परेशान हुए. देवी माँ की कृपा से अगली फ्लाईट में जगह मिल गई वरना न जाने कितनी परेशानी उठानी पड़ती. इस सबके लिए कौन जिम्मेदार था, लालूजी और उनका मंत्रालय. पर लालूजी को तो हार पहनाये जा रहे हैं.
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Monday, May 12, 2008
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