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Friday, September 17, 2010

वाटर फिल्टर्स और पीने का पानी - कितना सुरक्षित?


आपने अपनी रसोई में वाटर फ़िल्टर अवश्य ही लगा रखा होगा. इसके लिए काफी पैसे खर्च किये होंगे. यह सोच कर बहुत संतोष के साथ आप फ़िल्टर का पानी पीते होंगे कि यह पानी पूर्ण रूप से सुरक्षित है. परन्तु आज अखवार में छपी ख़बरों के अनुसार यह सही नहीं है. अधिकाँश वाटर फ़िल्टर वाइरस (विषाणु) को दूर नहीं करते. वाटर फ़िल्टर निर्माताओं के पूर्ण सुरक्षित पानी के दावे गलत हैं. पूरी जानकारी के लिए साथ की फोटो पर क्लिक करें. आन लाईन पढ़ने के लिए क्लिक करें.

मैंने भामाब्यूरो की वेबसाईट पर देखा - केमिकल डिपार्टमेंट में एक समिति है एम्एचडी-२२ जिसने वाटर प्योरिफिकेशन सिस्टम पर मानक बनाया है जिस का नंबर है आई एस १४७२४. भामाब्यूरो ने १२ वाटर फ़िल्टर निर्माताओं को लाइसेंस दिए हैं जिन के अंतर्गत यह निर्माता अपने वाटर फिल्टर्स पर आई एस आई मुहर लगाते हैं.

पुणे स्थित नेशनल इंस्टीटयूट आफ विरोलोजी (एनआईवी) द्वारा की गई एक स्टडी में यह कहा गया है कि भारत में निर्मित आठ ब्रांड्स के वाटर फिल्टर्स में केवल दो ऐसे पाए गए जिन में विषाणु पूर्ण रूप से दूर कर दिए गए. लेकिन इस संस्था ने इन ब्रांड्स के नाम बताने से इनकार कर दिया. ग्राहकों को यह अधिकार है कि इन ब्रांड्स के बारे उन्हें जानकारी दी जाय. मैं सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत यह जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न करूंगा. एनआईवी भामाब्यूरो की समिति का सदस्य है.

इस स्टडी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में वाटर फ़िल्टर जैसे उपकरणों की जांच करने के कोई मानक नहीं हैं. एनआईवी ने अपनी स्टडी के लिए अमरीका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के मानकों का प्रयोग किया. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो समिति इस रिपोर्ट की जांच करेगी. भामाब्यूरो को एनआईवी से यह जानकारी लेकर देखना चाहिए कि वह कौन लाइसेंसधारी हैं जिनके वाटर फिल्टर्स टेस्ट में फेल हुए है और फिर उन पर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए. मैं भी भामाब्यूरो से यह जानकारी लेने का प्रयत्न करूंगा पर भामाब्यूरो से आसानी से जानकारी नहीं मिलती, इस लिए मुझे सूचना अधिकार अधिनियम का सहारा लेना होगा.

यह बहुत ही दुःख का विषय है कि नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता न तो उत्पाद/सेवा प्रदाता करते हैं और न ही सरकार. रोज अखवारों में दिल घबरा देने वाली ख़बरें आ रही हैं. नकली दूध, फल और सब्जिओं में खतरनाक रसायन, बोतल बंद पानी में खतरनाक रसायन के बारे में अखवारों में आता रहा है. कल शहद में एंटीबायोटिक्स होने के बारे में खबर थी. आज फिल्टर्ड पानी के सुरक्षित न होने की खबर है. कहते हैं ग्राहक राजा है. यह कैसा राजा है जिसे हर समय अपने जीवन की सुरक्षा का खतरा लगा रहता है?