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Sunday, January 02, 2011

सरकार ने कहा 'जागो ग्राहक' और खुद सो गई

प्रिंट मीडिया और टीवी पर आप को अक्सर एक विज्ञापन दिखाई देता है - जागो ग्राहक. इन विज्ञापनों में सरकार अलग-अलग विषयों पर ग्राहकों को समझाती है और बाद में कहती है कि हे ग्राहक जागो, एक जिम्मेदार ग्राहक बनो, आपके कुछ अधिकार हैं इसलिए अपने कर्तव्य निभाओ. काफी साफ़-सुथरे जानकारी-वर्धक विज्ञापन हैं यह. पर सिर्फ विज्ञापन दे देने से तो काम नहीं चलता. सरकार को खुद भी कुछ करना चाहिए. यह क्या बात हुई कि सरकार ने विज्ञापन दे कर ग्राहकों को जगाया और खुद सो गई?

अब ग्राहक रो रहे हैं, सरकार सो रही है

प्याज के दाम बढ़ते रहे और सरकार सोती रही. जब ज्यादा हाहाकार मचा तब शीलाजी ने उनींदी आँखों से देखा और कहा कि मीडिया ने दाम बढ़ा दिए और फिर सो गईं. प्याज को अकेले ऊपर चढ़ना अच्छा नहीं लगा तो उस ने कुछ और सब्जियों, जैसे टमाटर, को भी साथ ले लिया. ग्राहकों की आँखों की नींद उड़ गई पर सरकार सोती रही. बीच में एक बार उठी और कहा कि विजली के दाम ३०% बढ़ेंगे. ग्राहकों का हार्ट फेल होते-होते बचा. नींद में सरकार एक बार फिर बड़बड़ाई और सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ गए. नींद में जरा सा झटका लगता है और पेट्रोल और दूध के दाम बढ़ जाते हैं.

एक, दो और तीन बार जनता ने शीलाजी को जिता दिया. जनता की इस मूर्खता से शीलाजी के मन में इस जनता के लिए जो थोडा सा आदर शेष था वह पिछली जीत पर बिलकुल ही समाप्त हो गया. अब तो उन्हें पूरा विश्वास हो गया है कि इस वेबकूफ जनता के पास उन्हें जिताने के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं है. इस लिए क्यों इस जनता के लिए अपनी नींद खराब की जाए?

अब ग्राहक जाग रहे हैं और रो रहे हैं. सरकार सो रही है और सोते-सोते हंस रही है. बीच-बीच में सरकार नींद से उठती है और 'जागो ग्राहक' का नारा लगा कर फिर सो जाती है.

अब तो कोई चमत्कार ही ऐसा कर सकता है कि जनता रोना बंद कर दे, तन कर खडी हो जाए, और कहे - जागो सरकार, जनता का मजाक उडाना बंद करो, अपना सोच बदलो वरना हम तुम्हें बदल देंगे.

Saturday, August 28, 2010

दिल्ली के हैरान-परेशान नागरिक

साझा (काला) धन खेलों के आयोजन के नाम पर दिल्ली की जनता को जिस प्रकार हैरान-परेशान किया जा रहा है वह दिल्ली सरकार के लिए अत्यंत शर्म की बात है. दिल्ली के कुछ इलाकों को देख कर तो ऐसा लगता है जैसे वहां हवाई हमला हुआ हो. यह और बात है की दिल्ली सरकार और काला धन खेल आयोजन समिति के मालिक शर्मसार होने के बजाय गर्व अनुभव कर रहे हैं. जनता के हजारों करोड़ रूपए जिस बेदर्दी से खर्च किये गए हैं और इन लोगों की जेब में गए हैं, वह राष्ट्र और जनता के प्रति एक भयंकर अपराध है. लेकिन उन्हें इस अपराध की सजा नहीं मिलेगी. खेलों के बाद सब रफा-दफा कर दिया जाएगा और इन बेईमानों को पुरुस्कार पदक दे दिए जायेंगे.

संलग्न चित्र पर आप क्लिक करें तो पायेंगे कि अब दिल्ली की मुख्य मंत्री कह रही हैं कि इन्द्र देवता उनसे नाराज हैं. यथार्थ तो यह है कि इंद्र देवता उनसे बहुत खुश हैं. दिल्ली में वारिश करा कर उन्होंने मुख्य मंत्री को एक और बहाना बनाने का मौका दे दिया है. दिल्ली के नागरिक इन 'बहाना मुख्य मंत्री' द्वारा इतने प्रताड़ित किये गए हैं कि अब किसी और किसी प्रताड़ना का कुछ असर नहीं होता. बेबस वह बस इस का इन्तजार कर रहे हैं कि कब इस प्रताड़ना का अंत होगा.

Saturday, September 26, 2009

Delh citizens are meant to be harassed.


Government, product and service providers in India have invented many ways to harass Indian citizens.

Electronic energy meters are under mandatory certification under Bureau of Indian Standards Act. All energy meters have to be marked with ISI mark under BIS Product Certification Scheme. Under this scheme, meters are regularly drawn from factories and market and tested by BIS in independent laboratories. I do not understand how faulty meters are purchased by discoms.

As far as walking on Delhi roads is concerned, you are lucky if you are back home in one peace. Shiela Dikshit calls it a world class city, Chidambaram calls it a big and good international city and advises Delhi citizens to behave.