मैंने १५ सितम्बर २०१० को इस ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी थी - दिल्ली सरकार - ग्राहकों की दोस्त या दुश्मन. पढ़ने के लिए क्लिक करें.पहले तो दिल्ली की मुख्य मंत्री को जैसे ही पता चला कि डीईआरसी विजली की दरें कम करने जा रहा है वह घबडा गईं उन्होंने खुद दौड़ कर डीईआरसी को विजली की दरें कम करने के आदेश को जारी करने कि सिफारिश करने से ही रोक दिया. बाद में जब डीईआरसी ने यह सिफारिश कर ही डाली तब उन्होंने उसे यह कह कर अस्वीकार कर दिया कि वह डीईआरसी के चेयरमेन कि निजी राय है. बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहा कि उन्हें डीईआरसी को निर्देश देने का अधिकार नहीं है. इस बीच डीईआरसी के चेयरमेन रिटायर हो गए.
अब नए चेयरमेन ने विजली की दरें बढाने की सिफारिश कर डी और दिल्ली सरकार ने उसे मान लिया है. इस सिफारिश के अनुसार विजली दरें लगभग ३०% बढ़ जायेंगी. तेल और दूध के दाम कई बार बढ़ चुके हैं. जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं. प्याज ने तो नागरिकों को रुला दिया है. ऐसे में विजली की दरें एक तिहाई बढ़ाना तो जनता की कमर हो तोड़ देगा.
कुछ महीने पहले डीईआरसी के चेयरमेन ने कहा था कि सब विजली कम्पनियों को काफी लाभ हुआ है और यह कम्पनियां झूट बोल रही हैं कि उन्हें नुक्सान हो रहा है. अब नया डीईआरसी का चेयरमेन आ गया है और वह विजली कम्पनियों की हाँ में हां मिला रहा है. साथ के फोटो पर क्लिक कर के देखिये इस कहानी को.
फैसला आप कीजिए कि दिल्ली सरकार ग्राहकों की दोस्त है या दुश्मन. मेरे विचार में तो ग्राहकों की सब से बड़ी दुश्मन है दिल्ली सरकार. जनता ने इस सरकार को तीसरी बार चुना और इस एहसान फरामोश सरकार ने उन्हीं को कैसे धोखे और झटके दिए हैं.
