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India Against Corruption - A Jan Lokpal Bill has been designed which has strong measures to bring all corrupt people to book. Join the cause and fight to force politicians to implement this powerful bill as an act in the parliament.
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Friday, February 04, 2011

आईएसआई मार्क और उत्पाद की गुणवत्ता ???

आईएसआई मार्क भारतीय मानक ब्‍यूरो (भामाब्यूरो) की प्रमाणन मुहर है जो उन उत्पादों पर लगाई जाती है जो भामाब्यूरो द्वारा प्रमाणित हैं. किसी उत्पाद पर इस प्रमाणन चिन् (मानक मुहर) की उपस्थिति इस बात का आश्वासन है कि उत्पाद की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक के अनुरूप है और इसे भामब्यूरो द्वारा पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही स्वीकृत किया गया है.

भारतीय मानक ब्‍यूरो
(पहला नाम - भारतीय मानक संस्था, वर्ष १९४७ में गठित की गई) को भारतीय संसद द्वारा पारित विधान, भारतीय मानक ब्‍यूरो अधिनियम १९८६, के अंतर्गत गठित किया गया है. भामाब्यूरो केंद्र सरकार के 'उपभोक्ता मामले मंत्रालय' के नियंत्रण में एक स्वायत्त संस्था है. इस अधिनियम द्वारा प्रदत वैधानिक अधिकार से भामाब्यूरो एक 'उत्‍पाद प्रमाणन योजना' चला रहा है. यह उत्पाद प्रमाणन योजना १९५५ में आरंभ हुई थी. इसके अंतर्गत लाइसेंसधारी को प्रमाणन मुहर (आईएसआई मार्क) के स्व-उपयोग की स्‍वीकृति दी जाती है. भामब्यूरो अब तक विभिन्न उत्पाद निर्माताओं को ३५००० से अधिक लाइसेंस स्‍वीकृत कर चूका हैं, जिसमें कृषि, वस्‍त्रादि, पेय/खाद्य पदार्थ, विद्युत्/इलैक्‍ट्रॉनिक उत्पाद, रसोई गैस के सिलिंडर एवं वाल्व, गहराई से पानी निकलने के हस्तचालित पम्प, स्टील/पीवीसी निर्मित पीने/कृषि योग्य जल आपूर्ति के ट्यूब्स शामिल है.  भारतीय उपभोक्ता ने आईएसआई मार्क में अपना पूरा विश्वास व्यक्त किया, पर पिछले कुछ वर्षों से आईएसआई मार्क से उपभोक्ताओं का विश्वास उठता जा रहा है. कुछ लोग तो यहाँ तक कहते सुने जाते हैं कि स्वयं भामब्यूरो के कर्मचारी आईएसआई मार्क उत्पाद नहीं खरीदते.

भामाब्‍यूरो उत्‍पाद प्रमाणन योजना एक स्‍वैच्छिक योजना है और
अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संस्था (आईएसओद्वारा प्रकाशित मार्गदर्शिका २८ पर आधारित है. इस मार्गदर्शिका के अंतर्गत भामाब्‍यूरो फैक्‍टरी का प्रारंभिक परीक्षण एवं उस की 'गुणता प्रबंध पद्धति' का  मूल्‍यांकन करता है और उत्‍पाद की गुणवत्ता की मानकों से अनुरूपता को निर्धारित व स्‍वीकृत करता है. यह स्‍वीकृति फैक्‍टरी के गुणता प्रबंध पद्धति की निगरानी व फैक्‍टरी से लिए गए नमूनों की स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में जांच के बाद ही दी जाती है. सभी भामाब्‍यूरो प्रमाणन भारतीय मानकों के अनुसार किए जातें हैं. भामब्यूरो अपनी लगातार निगरानी द्वारा ब्यूरो द्वारा प्रमाणित उत्पादों की गुणता पर पैनी नजर रखता है. इसके लिए ब्यूरो के अधिकारी समय-समय पर फेक्ट्री में बिना बताये जा कर इंस्पेक्शन करते हैं, फेक्ट्री और बाजार से उत्पाद के नमूने ले कर उनकी स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच की जाती है. किसी प्रकार की कोई भी कमी पाए जाने पर उस का विस्तृत अध्ययन किया जाता है और मूल कारणों का पता लगाया जाता है और कमी के लिए जिम्मेदार कारणों को दूर किया जाता है. यदि उत्पाद निर्माता उस कमी को जल्दी दूर नहीं कर पाता है तब उस से आईएसआई मार्क लगाने का स्व-अधिकार वापस ले लिया जाता है. यह अधिकार उसे तब ही वापस मिलता है जब गुणवत्ता में कमी के सारे कारणों को प्रभावशाली तरीके से दूर कर दिया जाता है और ब्यूरो के सक्षम अधिकारी पूर्ण रूप से अपनी संतुष्टि कर लेते हैं. ऐसा न होने पर उत्पाद निर्माता से लाईसेंस वापस ले लिया जाता है. ग्राहक भी उत्पाद गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर ब्यूरो को शिकायत कर सकता है. ब्यूरो अधिकारी शिकायत की तुरंत जांच करते हैं और शिकायत सही पाए जाने पर ख़राब उत्पाद के स्थान पर सही उत्पाद दिलवाया जाता है.

यह बहुत अधिक दुःख का विषय है कि
आईएसआई मार्क की अपनी गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया है. इस के लिए ब्यूरो, ब्यूरो अधिकारी, ब्यूरो की नीतियों और कार्यविधियों में बिना पूर्ण विचार के किये  गए परिवर्तन, मंत्रालय का अनावश्यक हस्तक्छेप काफी हद तक जिम्मेदार हैं. ब्यूरो एक साइंटिफिक संस्था है पर काफी समय से इस के महानिदेशक और अन्य पदों पर आईएएस अधिकारियों की गैरकानूनी नियुक्ति की जा रही है. यह ब्यूरो की गिरती साख का मुख्य कारण है.
 
कहानी बहुत लम्बी है पर ग्राहकों को सुनानी जरूरी है. इस लिए मैं इसे एक लेख श्रंखला के रूप में प्रकाशित कर रहा हूँ. आगे के भागों में विस्तार से गुणवत्ता हनन की कथा पर चर्चा की जायेगी. 

नोट - हर उत्पाद के लिए मानक मुहर अलग गजट की जाती है. इस के ऊपर भारतीय मानक का नंबर होता है और नीचे लाईसेंस नंबर.    

Tuesday, January 18, 2011

आम आदमी की सरकार ??? नहीं, अब और धोखे में मत रहो !!!


कांग्रेस सरकार हमेशा से ही आम आदमी को यह कह कर मूर्ख बनाती रही है कि वह हमेशा आम आदमी के हित में सोचती है. सच्चाई यह है कि न तो सरकार आम आदमी के हित में दोचती है और न ही कुछ करते है, हाँ वह ऐसा कहती जरूर है.

दिल्ली सरकार ने विजली की दरें कम नहीं होने दीं. अब वह विजली कम्पनियों के साथ मिल कर उन्हें बढाने जा रही है. रसोई गैस की कीमतों को बढ़ा दिया गया है. खाद्द पदार्थों की कीमतें तो उस ने आसमान पर पहुंचा दी हैं. आम आदमी न तो घर में सुरक्षित है और न ही घर के बाहर.

सरकार की नीतियों के कारण पेट्रोल की कीमतें हर महीने बढती हैं. साथ की फोटों पर क्लिक करें तो आपको समझ आएगा कि यह किसकी सरकार है? आम आदमी की तो हरगिज नहीं है. जागो ग्राहक जागो, कब तक सोते रहोगे, मूर्ख बनते रहोगे. इस सरकार से अपनी रक्षा करो. आज आम आदमी की सबसे बड़ी दुश्मन यह सरकार है.

Friday, January 14, 2011

गलती नगर निगम की, भुगतें नागरिक

दिल्ली नगर निगम ने एक लाख नागरिकों को नोटिस भेजे हैं जिसमें उन्हें हिदायत दी गई है की वह ३१ मार्च २००४ तक बने संपत्ति कर की बकाया राशि जमा करें. इन में से बहुत से नागरिकों का कहना है की उन्होंने संपत्ति कर समय से जमा कर दिया था, पर नगर निगम के रिकार्ड्स में गड़बड़ होने की वजह से सब से बकाया राशि मांगी जा रही है. कर जमा किया गया है यह साबित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी गई है. निगम के पास पिछले भेजे गए नोटिसों की कोई प्रतिलिपि नहीं है. नगर निगम के रिकार्ड्स में अगर गड़बड़ है तब उसका खामियाजा नागरिक क्यों भुगतें? अब नागरिक निगम के दफ्तरों का चक्कर लगायेंगे और निगम के भ्रष्ट कर्मचारी उन्हें परेशान करेंगे और रिश्वत मानेंगे.

सरकार कहती है, ग्राहक जागो. क्या करे बेचारा ग्राहक जाग कर? कोई सुनता है उसकी? अब निगम कर्मचारियों की गलती की सजा नागरिकों को दी जा रही है, क्या सरकार सुनेगी और कर्मचारियों पर कार्यवाही करेगी? न्याय तो यही कहता है की जो गलती करे सजा उसे मिले.

लोगों का यह कहना सही है, सरकार ग्राहकों के नहीं, भ्रष्टाचारियों के साथ है. भ्रष्ट कर्मचारी, अधिकारी और सरकार नए-नए तरीके निकालते हैं भ्रष्टाचार के. ग्राहक बेचारा पिस रहा है. उस के साथ कोई नहीं है.

Friday, September 24, 2010

Protect yourself from misleading advertisements

Click on the image to read how some product/service providers mislead you in to buying their products/services and make you repent later. It is your hard earned money. Before you part with it, you should very carefully read the advertisement, especially if it says 'conditions apply'.

Normally these conditions are not printed in the advertisement. You will have to especially ask for them. In almost all cases, the conditions are anti-consumer and includes conditions which are loaded in favour of product/service provider, and will put you to lot of inconvenience and loss of money. The product/service, which you think has come at a lower price, may in reality be very costly and of sub-standard quality.

So, dear consumers protect yourself from such misleading advertisements. Be catious. कहते हैं कि सावधानी में ही सुरक्षा है.

Thursday, August 26, 2010

ग्राहक शिकायत क्यों करते हैं?

क्या आप ने कभी ऐसा ग्राहक देखा है जो कहता हो, 'शिकायत करना मेरा शौक है'? शिकायत करना और उसे उस के सही अंजाम तक ले जाना एक बहुत मुश्किल काम है, जिस में पैसा, समय और ऊर्जा सब बरबाद होते हैं. बहुत कम प्रतिशत है ऐसी शिकायतों का जिन के परिणाम से ग्राहक पूरी तरह संतुष्ट हो. अक्सर ग्राहक शिकायतों को बीच में ही छोड़ देते हैं. मेरा एक मित्र कहता है कि अगर आप को किसी से दुश्मनी निकालनी हो तब उस से किसी उत्पाद-सेवा विक्रेता की शिकायत करवा दीजिये, और फिर उसे शिकायत के भंवर में छटपटाता हुआ देख कर खुश होते रहिये.

आप को ऐसे बहुत से लोग मिल जायेंगे जो आप की परेशानी में तुरंत आप को यह सलाह दे देंगे कि शिकायत कर दो. यह वह लोग होते हैं जिन्होनें या तो कभी शिकायत की ही नहीं होती या जिन्होनें शिकायत तो की थी पर उस के बाद कभी शिकायत न करने की प्रतिज्ञा भी कर ली थी. भारत में शिकायतकर्ता को पसंद नहीं किया जाता. एक छोटे से उत्पाद-सेवा विक्रेता से ले कर प्रधानमंत्री कार्यालय या राष्ट्रपति सचिवालय तक सब शिकायतकर्ता को शिकायती नजरों से देखते हैं. उनका वश चले तो शिकायत करना एक अपराध घोषित कर दें.

ग्राहक जब सब तरफ से निराश हो जाता है तब शिकायत करता है. अगर उस की शिकायत को पहले स्तर पर ही निपटा दिया जाय तब उसे ग्राहक अदालतों तक जाने की जरूरत ही न पड़े. लेकिन असंतुष्ट ग्राहक की बात ही कोई सुनना नहीं चाहता. उस के हर तर्क को नकार दिया जाता है. जब वह अदालत में पहुँचता है तब उस के खिलाफ वकील खड़े कर दिए जाते हैं. असंतुष्ट ग्राहक को सौ रूपए का मुआवजा नहीं देंगे पर वकीलों को हजारों रूपए दे देंगे. मेरा मानना है कि उत्पाद-सेवा विक्रेता अपने नकारात्मक व्यवहार से ग्राहक को शिकायत करने के लिए मजबूर कर देते हैं.