दिल्ली की मुख्यमंत्री, शीला दीक्षित, ने पिछले तीन चुनाव जीत कर अगर कुछ सीखा है तो वह है आम आदमी को किस तरह बेबकूफ बनाया जाय. सच कहा जाय तो आम आदमी को बबकूफ़ बना कर ही उन्होंने यह चुनाव जीते हैं. भारतीय राजनीति भी अजीब है, इसमें आम आदमी को जो पार्टी सबसे ज्यादा बेबकूफ बना दे वह जीत जाती है. इसमें शीला जी ने जो महारथ हासिल कर ली है वह किसी भी प्रकार से मायावती से कम नहीं है. यह दोनों महिलायें महान हैं. उत्तर प्रदेश में मायावती जी, और दिल्ली में शीला जी. मायवती जी अपनी मूर्तियाँ बनबाती हैं. शीला जी रोज सरकारी विज्ञापनों में अपनी फोटो छपवाती हैं. दोनों अपने-अपने तरीकों से आम आदमी को खूब बेबकूफ बनाती हैं.
आम आदमी को बेबकूफ बनाने के अपने अभियान में शीला जी ने कल एक और अध्याय जोड़ा जब दिल्ली में एक और हेल्पलाइन शुरू की गई. इस हेल्पलाइन को मुख्य मंत्री के 'कान और आँख' का नाम दिया गया है. यानी कि अब मुख्य मंत्री आम आदमी के कान और आँख से देखेंगी. इस का मतलब यह नहीं है कि मुख्य मंत्री के कान और आँख ठीक से काम नहीं कर रहे. वह ठीक ठाक काम कर रहे हैं, पर सारा समय वह इन्हें अपनी और अपनी पार्टी की स्वार्थसिद्धि के लिए प्रयोग करती हैं. आम आदमी के लिए अब वह आम आदमी के कान और आँख प्रयोग करेंगी. 'अपने हाथ मुझे दे दे ठाकुर' गब्बर ने कहा था. 'अपने कान और आँख मुझे दे दे आम आदमी' शीला जी ने कहा.
सब कुछ समझते हुए मैं भी बेबकूफ बन गया. कल मैंने काफी समय नष्ट किया मुख्य मंत्री के कान और आँख बनने के लिए पर जब भी फोन मिलाया यही आवाज आई - लाइन व्यस्त है, कुछ देर बाद फोन करें. हार कर सो गया. आज सुबह अखवार में पढ़ा कि ७० आम आदमी बेबकूफ बनने में कामयाब हो गए. ज्यादा आम आदमियों को जो बेबकूफी की वह नगर निगम द्बारा बेबकूफ बनाने से सम्बंधित थीं. अब इसका इस्तेमाल करेंगी शीला जी, नगर निगम पर अपना अधिकार हासिल करने के लिए. आम आदमी तो परेशान है और परेशान रहेगा. देखा फिर बना दिया न शीला जी ने आम आदमी को बेबकूफ. हो सकता है कामनवेल्थ खेलों के बाद सोनिया जी उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित भी कर दें. आखिरकार शीला जी उनके लिए भी तो आम आदमी को बेबकूफ बनाने का काम कर रही हैं.
आप धन्य हैं शीला जी. मुझे भी बेबकूफ बना दिया. सब को समझाता हूँ पर खुद बेबकूफ बन गया. लगा रहा घंटों फोन पर. यही तो महानता है शीला जी आपकी. फिल्म निकाह में एक गाना था - शायद उनका आखिरी हो यह सितम (बेबकूफ बन्नाना), हर सितम यह सोच कर हम सह गए (बेबकूफ बन गए).