दोपहर में सड़कों की विजली आन
में अभी रोहिणी से घर वापस आया. बाहरी रिंग रोड पर विजली अभी भी जल रही थी. इतनी तेज धूप में विजली कम्पनिओं ने किस कारण से विजली जला रखी होगी? ऐसा मैंने पहले भी कई बार देखा है. आप में से भी कई लोगों ने देखा होगा.
जो सरकार और विजली कम्पनियाँ जनता को विजली बचाने के उपदेश देती रहती हैं, ख़ुद इस प्रकार विजली नष्ट कर रही हैं. यह लोग विजली की चोरी रोकने में नाकामयाब हैं और ख़ुद भी इस तरह विजली व्यर्थ खर्च करते हैं. इस का खामियाजा बेचारी ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है.
आज कल विजली कंपनियां फ़िर से विजली की कीमत बढ़ाने का अभियान छेड़े हुए हैं. कितनी शर्म की बात हे कि इन कम्पनिओं की नालायकी की कीमत जनता को चुकानी पड़ती है. अफ़सोस यह है कि जनता के प्रतिनिधि इस मामले में कुछ नहीं करते. सरकार तो इन कम्पनियों के साथ है ही. जनता बेचारी क्या करे.
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