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Saturday, June 14, 2008

महंगाई का कोल्हू

लगता है मनमोहन को महंगाई बहुत मनमोहक लगती है.अर्थ का शास्त्र पढ़ा है न उन्होंने, इसलिए आम आदमी का तेल निकाल रहे हैं महंगाई के कोल्हू में. शायद यह भी सोच रहे हैं कि इस से तेल की कमी भी पूरी हो जायेगी.
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"जनता को सताने में बहुत मजा (sadistic pleasure) आता है डीडीऐ को", दिल्ली हाई कोर्ट.
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उनका चेक बाउंस हो गया, उन पर मुकदमा चला, वह अदालत में हाजिर नहीं हुए, अदालत ने कई सम्मन भेजे. पर वह फ़िर भी हाजिर नहीं हुए. अदालत ने दिल्ली पुलिस को खूब फटकारा और गैर-जमानती वारंट इशू कर दिया. पुलिस उनके घर आई उन्हें गिरफ्तार करने. अब उनका शव मुर्दाघर में है.
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"मेरे घर वाली गली में एक महीने से झाड़ू नहीं लगी",
"पिछले महीने हमारी नाली साफ हुई थी पर कीचड़ अभी भी हमारे दरवाजे पर पड़ी है:,
ऐसी सैकड़ों शिकायतें दिल्ली नगर निगम के पार्षद के पास आती हैं.
पार्षद जी ने बताया कि कोई सफाई कर्मचारी काम नहीं करता. उनके पीछे पड़ कर एक-एक शिकायत दूर करानी पड़ती है. सारा समय इसी में निकल जाता है.
हमने कहा, कहा, "फ़िर विकास का काम कब होगा?".
उन्होंने कहा, "अरे झाड़ू मारिये विकास को. अगर मैंने यह झाड़ू नहीं लगवाई तो अगले चुनाव में मेरे को झाड़ू लगा देंगे यह लोग".
हम पहुंचे सफाई कर्मचारियों के पास. उन्होंने कहा, "साहब, अगर सारा काम अपने आप हो जाए तो कोई तारीफ़ नहीं करता. अब शिकायत करेंगे तो देर सबेर काम हो ही जायेगा. जमता खुश होगी कि उसकी शिकायत पर कार्यवाही हुई. हमें भी कुछ चाय पानी का पैसा मिलेगा. पार्षद जी भी खुश होंगे और जनता से कह सकेंगे कि देखिये हम ने आप की शिकायतों पर कार्यवाही करवाई. उन्हें भी तो चुनाव जीतना है अगली बार".
हमने पूछा, "बाकी समय क्या करते हैं आप?".
उन्होंने कहा, "ताश खेलते हैं और गुर्जर आन्दोलन पर बहस करते हैं".
हम चुप रहे.
वह मुस्कुराए, "अरे जाने दीजिये न, सब खुश हैं. आप क्यों परेशान होते हैं? आप अपने घर का नंबर बताइये, वहाँ सफाई ठीक से करवा देंगे. आपको पार्षद जी को शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी".
हम वापस आने के लिए मुड़े.
तभी उन्होंने कहा. "साहब आप तो पढ़े-लिखे हैं. यह वसुंधरा सरकार आने वाले चुनाव में जीत पायेगी क्या? या गुर्जर इस सरकार को खा जायेंगे?".
हम मुस्कुरा दिए. एक खुशी भी हुई मन में. देखो हमारे सफाई कर्मचारी भी कितने सजग हैं प्रजातंत्र के लिए!