मनमोहन जी द्बारा मुद्रास्फीति का नया रिकार्ड
पिछली बार जब मनमोहन जी ने मुद्रास्फीति की दर का रिकार्ड बनाया था तब वह वित्त मंत्री थे। इस बार वह प्रधान मंत्री हें। आज की ख़बरों के अनुसार मुद्रास्फीति की दर ११.०५ प्रतिशत हो गई है। लगता है उन का और मुद्रास्फीति का कोई अटूट रिश्ता है।
पिछली बार यह कारनामा कांग्रेस सरकार के आखिरी साल में हुआ था, और चुनाव में सरकार हार गई थी। इस बार भी यह कारनामा सरकार के आखिरी साल में हुआ है। क्या इस बार भी कांग्रेस चुनाव हारेगी? मेरे विचार में हारना चाहिए। आग लगा दी है इस मंहगाई ने। मेरे जैसे पेंशन याफ्ता लोग क्या करें? कल जो सब्जी १६ रूपया किलो थी आज वह २० रुपया किलो है। एक न टूटने वाला चक्कर बन गया है। पहले बाज़ार में कीमतें बढ़ती हें। फ़िर उस से मंहगाई बढ़ती है। अखबार में बढ़ती मंहगाई की ख़बर से दुकानदार कीमतें और बढ़ा देते हें। कोंई कंट्रोल नहीं है इस सरकार का मंहगाई पर। सिवाय प्रदेश सरकारों को दोष देने के यह सरकार कुछ नहीं कर सकती। आम आदमी की सरकार आम आदमियों को निगल रही है।
एक भी तो कायदे का काम नहीं कर पाई यह सरकार। सारा समय मनमोहन जी अल्पसंख्यकवाद का राग अलापते रहे। इस सरकार के सारे फैसलों ने मंहगाई को ही बढ़ाया। वोट के चक्कर में जनता का पैसा इधर-उधर की तुष्टिकरण की योजनाओं में बरबाद करती रही यह सरकार। और तकलीफ की बात यह है की जिनके लिए यह किया गया उन्हें कोंई फायदा नहीं पहुँचा।
एक वरिष्ट नागरिक के दिल के दर्द है यह।



